प्रेम अनुभूति का विषय है..इसीलिए इसकी अभिव्यक्ति की जरूरत सबको महसूस होती है.. अतः,अपनी मौलिक कविताओं व रेखाचित्रो के माध्यम से, इसे अभिव्यक्त करने की कोशिश कर रहा हू मैं यहाँ.
गुरुवार, 6 जून 2019
मंगलवार, 4 जून 2019
बीते दिनों में
बीते दिनों में
कुछ-कुछ तुम बची हो
कुछ-कुछ हम बचे है
बाकी सब नदारद हो चुका है
चंचल चितवन
रुई के फाहे सी नर्म बातें
इक्का-दुक्का अनायास हुई मुलाकातें
चौक
गली
मन्दिर
और पगडण्डी
टूटे-फूटे खण्डहर से दिखते है
कहाँ तुम बस गयी हो
कि इधर कभी आना ही नही हुआ
तुम्हारा
और कहाँ मैं हु कि
दूर-दूर तक दिखाई ही नही देती
तुम।
रेखचित्र व कविता - रवीन्द्र भारद्वाज
रविवार, 2 जून 2019
शनिवार, 1 जून 2019
गुरुवार, 30 मई 2019
बुधवार, 29 मई 2019
मंगलवार, 28 मई 2019
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सोचता हूँ..
सोचता हूँ.. तुम होते यहाँ तो बहार होती बेरुत भी सोचता हूँ.. तुम्हारा होना , न होना ज्यादा मायने नही रखता यार ! यादों का भी साथ बहुत होता...
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