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शनिवार, 22 दिसंबर 2018

हवा और समय

Art by Ravindra Bhardvaj
जब हवा चलती है 
तुम्हारे साथ होने का एहसास होता है 

जब हवा रुक जाती है 
तुम्हारे गुम हो जाने का एहसास होता है 

जब-जब गुजरता हूँ 
गाँव के इकलौते पुराने पीपल के पेड़ के नीचे से 
तुम्हारे गुनगुनाने का आवाज़ सुनता हूँ 

हवा 
और समय 
तुम्हारे मीत है 

जब चाहो भेज देती हो 
जब चाहो बुला लेती हो.
- रवीन्द्र भारद्वाज 


सोचता हूँ..

सोचता हूँ.. तुम होते यहाँ तो  बहार होती बेरुत भी  सोचता हूँ.. तुम्हारा होना , न होना  ज्यादा मायने नही रखता यार !  यादों का भी साथ बहुत होता...