मंगलवार, 28 मई 2019

परिंदे और आदमी

परिंदे 
उड़ते-उड़ते 
किसी ऐसे जगह पर जा पहुचेंगे
जहाँ थोड़ा-बहुत तो जरूर सुकून हो 

लेकिन
हम 
एकांत की खोज में 
भीड़ में शामिल हो जायेंगे

कविता - रवीन्द्र भारद्वाज

चित्र - गूगल से साभार


2 टिप्‍पणियां:

  1. जी सही कहा आपने सुंदर पंक्तियां

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  2. सारगर्भित चिंतन प्रिय रविन्दर जी। हार्दिक शुभकामनाएं।

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