शुक्रवार, 29 मार्च 2019

सबका हश्र बुरा होता हैं प्यार में

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तिनका जितना 
रखना 
ग़वारा न समझा 
उसने 
मुझे 
अपनी जिन्दगी में 

जानता हूँ 
सबका हश्र बुरा होता हैं 
प्यार में 
मेरा भी हुआ 
अब बात पते की लगने लगी हैं 

प्यार पर बनी फ़िल्में भी 
नायक और नायिका के 
बुरे हश्र की गाथा गाती नजर आती हैं 
ज्यादातर 

असल में 
प्यार उतना भी बुरा नहीं 
जितना हमने माना हैं 
समझा हैं 
जाना हैं 

लेकिन उसने ये मानकर बहुत बड़ी गलती की 
कि
प्यार हैं बस थोथी कल्पना 

कविता - रवीन्द्र भारद्वाज

चित्र - गूगल से साभार 


14 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 29/03/2019 की बुलेटिन, " ईश्वर, मनुष्य, जन्म, मृत्यु और मोबाइल लगी हुई सेल्फ़ी स्टिक “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    उत्तर
    1. आभार... आदरणीय इस रचना को ब्लॉग बुलेटिन में जगह देने के लिए
      सादर

      हटाएं
  2. व्यथित मत हो कविराज ! तुम कल्पना को साकार करने की सामर्थ्य रखते हो. वो न सही तो कोई और सही !

    जवाब देंहटाएं
  3. प्रेम में अक्सर ऐसा होता है ... अंत हर प्रेम का ऐसा पर कल्पना से बाहर आ के आगे बढ़ जाना ही जीवन ...
    अच्छी रचना ...

    जवाब देंहटाएं
  4. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (31-03-2019) को " निष्पक्ष चुनाव के लिए " (चर्चा अंक-3291) पर भी होगी।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है

    --अनीता सैनी













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    उत्तर
    1. 'चर्चा मंच' में इस रचना को स्थान देने के लिए आभार आदरणीया
      सादर

      हटाएं

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