रविवार, 29 दिसंबर 2019

एकबार कहा होता


एकबार कहा होता
'मुझे जाना है 
तुम्हे छोड़कर..'

तो मैं तुम्हे जाने देता 
बड़े शौक से

लेकिन 
तुम तो बिना कुछ बताये चल दिए 
आसमान को 
छूने 

जबकि मैं तो तुम्हारा पहाड़ था न 

- रवीन्द्र भारद्वाज

2 टिप्‍पणियां:

सोचता हूँ..

सोचता हूँ.. तुम होते यहाँ तो  बहार होती बेरुत भी  सोचता हूँ.. तुम्हारा होना , न होना  ज्यादा मायने नही रखता यार !  यादों का भी साथ बहुत होता...