गुरुवार, 19 दिसंबर 2019

आखिर, क्यों !

तुमने मुझसे वो मांगा 
जो मैं दे नही सकता था
फिरभी दिया

मेरा सबकुछ लेने के बाद 
लौटना भूल गई 

कभी याद दिलाया तो 
तुमको बहुत गुस्सा आया

आखिर, क्यों !


- रवीन्द्र भारद्वाज

3 टिप्‍पणियां:

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सोचता हूँ.. तुम होते यहाँ तो  बहार होती बेरुत भी  सोचता हूँ.. तुम्हारा होना , न होना  ज्यादा मायने नही रखता यार !  यादों का भी साथ बहुत होता...