शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

तुम रूठे

तुम रूठे 
मेरा जग रूठ गया 

मेरी दुनिया मे दरअसल,
बहुत कम लोग है 
इसलिए
अपने आप मे, मैं टूट गया

हमारे प्यार की पतंग 
अनन्त आसमान में 
निर्रथक ही 
गुम हो गई है 
अब

- रवीन्द्र भारद्वाज

2 टिप्‍पणियां:

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