सोमवार, 30 नवंबर 2020

वो और बात थी

वो और बात थी
जब तुम थी यहाँपर

यहाँ पर 
हरियाली थी
धूप था
और मन्द-मन्द बहता पवन था

कसमे थी 
वादे थे 
और ना थकने वाला इरादा था
तुमको लेकर

यहाँपर शोर था 
शरारत थी 
और कभी न खत्म होनेवाली बातचीत थी 
हमारे-तुम्हारे बीच

वो और बात थी 
जब तुम थी यहाँपर

- रवीन्द्र भारद्वाज

 

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