गुरुवार, 16 दिसंबर 2021

वृद्ध आदमी और नदी

 वृद्ध आदमी 
अपना अतीत देखता है 
पानी की रवानी संग 
बहता हुआ 

दरअसल
अपने लंगोटिया यारों को 
यही फूक-तापकर 
अस्थियां 
बहाई थी उसने
कभी 
इसी पानी में 

जाने कब भेंट होगा 
उनसे 
यही सोच रहा है 
वृद्ध आदमी
एकटक पानी की रवानी को देखता हुआ।

- रवीन्द्र भारद्वाज

7 टिप्‍पणियां:

  1. जाने कब भेंट होगा
    उनसे
    यही सोच रहा है
    वृद्ध आदमी
    एकटक पानी की रवानी को देखता हुआ।
    अत्यंत गहरी और हृदयस्पर्शि बात कही आपने कविता के माध्यम से!
    बहुत ही मार्मिक रचना...

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